Bhatner fort in hindi
भटनेर दुर्ग, (धान्वन दुर्ग) हनुमानगढ़
घग्घर नदी के मुहाने पर बसा भटनेर का किला हनुमानगढ़ में अवस्थित है। दिल्ली-मुल्तान मार्ग पर स्थित होने के कारण भटनेर का सामरिक महत्त्व था।
किले का नाम | भटनेर का दुर्ग |
स्थान | हनुमानगढ़ |
निर्माता | भाटी राजा भूपत |
निर्माण का समय | 295 ई. |
किले की श्रेणी | धान्वन दुर्ग |
विशेषता | किले का निर्माण पकी हुई ईंटों और चूने से हुआ था |
Table of Contents
भटनेर दुर्ग का निर्माण
जनश्रुति के अनुसार इस प्राचीन दुर्ग का निर्माण श्री कृष्ण की 90वीं पीढ़ी में जन्मे जैसलमेर के भाटी राजा भूपत ने 295 ई. में करवाया था।
भटनेर दुर्ग में 52 विशाल बुर्ज हैं। भटनेर का दुर्ग का निर्माण पकी हुई ईंटों और चूने से हुआ था।
Bhatner fort in hindi
भटनेर दुर्ग की श्रेणी
भटनेर दुर्ग का नाम भूपत ने अपने पिता की स्मृति में भटनेर रखा। मरुस्थल से घिरा यह दुर्ग ‘धान्वन दुर्ग’ की श्रेणी में आता है।
भटनेर दुर्ग का व्यापारिक महत्त्व
मध्य एशिया (Central Asia), सिन्ध (Sindh), काबुल (Kabul) के व्यापारी मुल्तान(Multan), भटनेर दुर्ग होते हुए दिल्ली व आगरा आते-जाते थे तो यह दुर्ग उनके पड़ाव का स्थल (पड़ाव बिंदु) था।
भटनेर दुर्ग की विशिष्ट स्थिति और सामरिक महत्त्व के कारण भटनेर दुर्ग को अपने निर्माण के बाद से जितने प्रहार/युद्ध झेलने पड़े उतने भारत में शायद ही अन्य किसी दुर्ग को झेलने पड़े। अनेक आक्रमणों का सामना करना पड़ा।
भटनेर दुर्ग पर महमूद गजनवी का अधिकार
भटनेर दुर्ग पर 1001 ई. में महमूद गजनवी (Mahmud Ghaznavi) ने अपना अधिकार कर लिया।
भटनेर दुर्ग पर शेरखाँ का अधिकार
बलबन के शासनकाल (1266-87 ई.) में शेरखाँ भटनेर दुर्ग का हाकिम (Princes) था, शेरखाँ ने भटनेर दुर्ग से मंगोल आक्रमणों (Mongol invasions)का सफलतापूर्वक सामना किया।
भटनेर दुर्ग पर तैमूर का आक्रमण
1398 ई. में भटनेर को तैमूर की क्रूरता का शिकार होना पड़ा। तैमूर ने अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-तैमूरी में यहाँ तक लिखा है कि उसने इतना मजबूत व सुरक्षित दुर्ग पूरे हिन्दुस्तान में कहीं नहीं देखा।
भटनेर दुर्ग पर पुनः भाटियों का अधिकार
तैमूर के बाद भटनेर पर पुनः भाटियों ने अधिकार कर लिया।
भटनेर दुर्ग पर राव जैतसिंह का अधिकार
भटनेर दुर्ग पर बीकानेर के राव जैतसिंह ने 1527 ई. में अधिकार कर राठौड़ों का आधिपत्य स्थापित किया।
भटनेर दुर्ग पर हुमायूँ के भाई कामरान का आक्रमण
हुमायूँ के भाई कामरान के आक्रमण (1534 ई.) के समय दुर्गाध्यक्ष खेतसी ने दुर्ग की रक्षार्थ अप्रतिम वीरता प्रदर्शित की।
भटनेर दुर्ग पर अकबर का अधिकार
1570 ई. के लगभग अकबर ने भटनेर पर अधिकार कर लिया, लेकिन राव ठाकुरसी के पुत्र बाघा की सेवा से प्रसन्न होकर भटनेर उसको सौंप दिया।
भटनेर दुर्ग पर राजा रायसिंह का अधिकार
इसके बाद भटनेर दुर्ग बीकानेर के राजा रायसिंह (1574-1612 ई.) और उसके पुत्र दलपतसिंह के अधीन रहा।
भटनेर दुर्ग पर महाराजा सूरतसिंह का अधिकार
महाराजा सूरतसिंह (Maharaja Surat Singh) द्वारा मंगलवार के दिन भटनेर दुर्ग पर अधिकार किए जाने के कारण भटनेर का नाम हनुमानगढ़ रख दिया गया
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